Monday, March 7, 2011

ये पानी...

ये पानी जब मेरी आँख से बहता है
तो दिल के ज़ख्मों को एक मरहम सा मिलता है
लोग इसे मेरी कमजोरी समझ लेते हैं
लेकिन इनसे मेरी ताकत को हौसला मिलता है

हर वक़्त ज़माने से लड़ते लड़ते
जब थक जाती हूँ मैं
यही वो पानी है जो सुकून देने के वास्ते
मेरे ज़ख़्मी रूह पर अब्र बनकर बरसता है

ये पानी धो देता है हर शिकवा शिकायत और गम
इस पानी से मेरा रूप और निखर उठता है
गंगा जल सा शुद्ध है ये पानी
जो मुझे लड़ने और बढ़ने की हिम्मत देता है...

3 comments:

  1. bahut badhiya. yeh hai jazba.

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  2. Vakai Pani mai kuch baat hai jo har gam dho deta hai, aur himmat bhi deta hai.

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  3. "ये पानी जब मेरी आँख से बहता है
    तो दिल के ज़ख्मों को एक मरहम सा मिलता है"

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