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Friday, November 29, 2013

गुलज़ार ज़िंदगी

ज़िंदगी कभी आर कभी पार चली जाती है
कभी यूँ  ही मझदार में बिछड़ जाती है

ख्वाबों से सजी लगती है ये दुल्हन मुझको
पलकों की कश्ती में सवार चली जाती है

अनगिनत रंगो का खज़ाना है ये
हर बार मुझे नए रंग में सराबोर कर जाती है

मैं चाहती हूँ ज़िंदगी को बहार कि तरह
वो जब भी आती है तो फ़िज़ा गुलज़ार कर जाती है... 

Saturday, October 26, 2013

हसरतें ऐसी ही होती हैं जो पूरी न हो सकें


दिल में कसमसाती रहें एक आह की तरह 
तीर सी चुभती रहें पैनी निगाह की तरह 

आग बनके कभी चैन को जलाती रहें 
दबी हुई प्यास को रह रह के जगाती रहें 

आँखों में कभी मिराज के धोखे की धूल भर दे 
और कभी भरे घाव में टीस सी पैदा कर दे। 

हसरतें अधूरी ही होती हैं, पूरी नहीं  
फिर भी इनके बिना ज़िन्दगी भी पूरी नहीं 

Friday, February 10, 2012

शब्दविहीन मैं, भावनाविहीन तुम


मैं अपनी भावनाओं को शब्दों में
व्यक्त करने में असमर्थ थी

और तुममें अपने शब्दों में भावनाओं का
समावेश करने का सामर्थ्य ना था...

मेरी भावनाएं बिना शब्दों की मदद के
तुम तक पहुचने का सेतु तलाश रही थीं

और तुम्हारे शब्द भावनाओं की कमी के कारण
मुझे शूल से भेदते जा रहे थे...

शब्दों की लम्बी खोज में मैंने
तुम तक पहुचने में देर कर दी

और तुम भी भावनाओं के अभाव में
खोखले शब्दों के जाल में उलझकर रह गए...