Monday, June 20, 2011

मौसम का जादू...

ये मौसम की नजाकत है या कुछ और
के दिल में जागे हैं अरमां कुछ नए से...

यूं तो हर बात कही सुनी है हमने मगर
कुछ जज्बात अब भी हैं अनकहे से...

कभी ऐसा भी था कि जबां रुकती न थी अपनी
अब लरजने लगे हैं होंठ कुछ भी कहने से...

पलकों को उठाने की हिम्मत नहीं होती
इनमें बंद हैं चंद हसीं ख्वाब नए से..

कुछ ऐसा जादू किया है फिजाओं ने हम पर
लोग कहते हैं कि हम भी लगे हैं कुछ बदलने से...

Wednesday, June 15, 2011

उस रोज़ कहा था तुमने

उस रोज़ कहा था तुमने 
धीरे से मेरे कानो में..
के एक दिन हम भी बनायेंगे 
एक आशियाना, पहाड़ों में....

दिन भर की मेहनत कर 
पहुचेंगे जब उस घर
मिलेगा वो सुकून हमको
जो मिलता नहीं अक्सर दूजे ठिकानों में...

तुम्हारे हाथ की कॉफ़ी
बनेगी और भी मीठी 
और अपनी रसोई भी
महकेगी पकवानों से...

ये सपने जो हैं सारे
बंद है आँखों में हमारे
आज भी देख लेते हैं
हम इन्हें रात के वीरानो में...

कभी कभी सोचती हूँ

कभी कभी सोचती हूँ के
गर अँधेरा अगर नहीं होता...
तो सूरज की अहमियत शायद
कोई नहीं समझता...
महरूम रह जाते सब
चांदनी के सुकून से
और जुगनू की चमक में
दिल मेरा नहीं खोता...

कभी कभी सोचती हूँ के
गर अँधेरा नहीं होता...
तो प्यार का वो अनोखा रंग
कहीं छुप जाता दिन के उजाले में
सुनहरी धुप तो मिलती
मगर तारे नहीं सजते आसमा के शामियाने में...
और कई सपने भी आँखों में 
कतरा जाते आने से...

जुदा लगते हैं रात और दिन
मगर वो एक दूजे के बिन अधूरे हैं 
दोनों की अपनी अहमियत है..
ज़िन्दगी में जिनकी ये दोनों हैं, वही पूरे हैं...

बारिश में मचलती ख्वाहिशें...


बदरा की गरजती बरसती धुन पर
थिरकती बरखा की बूँदें...
टपरों पर पड़ती उनकी थाप से उठता संगीत...
और इन् सबके साथ ताल मिलाने की हूक....

काश इस मौसम का मज़ा घर पर बैठकर नहीं 
बल्कि सड़कों पर घुमते हुए लिया जा सकता...
वहीँ बड़े तालाब के किनारे खड़े होकर या फिर
VIP रोड पर किसी का हाथ थामे टहलते हुए...

रिमझिम बारिश में होती एक लॉन्ग drive
भुट्टे की महक और बातों की लम्बी झड़ी...
कहीं रुक कर करते हम भी रेन डांस
और हम भी महसूस कर सकते इस मौसम का रोमांस..

तुम्हारी याद आती है...


अनजान राहों पर, चलते हुए यूँ ही
तुम्हारी याद आती है....
सड़क के किनारे पर, लगी उस बेंच को देखकर
तुम्हारी याद आती है...

मैं खड़ी थी फाटक पर, गई जब रेल गुज़रकर
तो याद आ गया मुझको, तेरे साथ का सफ़र...
उस सफ़र की यादें, गाहे बगाहे आ ही जाती हैं
मुझको बड़ा सताती हैं...

कभी लौटेंगे वो दिन भी
अभी उम्मीद है बाकी
दिल यही कहता है बार बार
जब भी तुम्हारी याद आती है...

Saturday, June 4, 2011

सौंधी सी खुशबु...

कहीं दूर से सौंधी सी खुशबु आई है मुझे
लगता है के मौसम बदलने वाला है...

धुप के नश्तर अब ना चुभेंगे मुझको
वो जल्द ही बादलों की चादर में छुपने वाला है...

रिमझिम फुहारों से तर होगी ज़मीं...
मेरा तन भी मन भी तर होने वाला है...

इस बार धरती को प्यासी ना रखना ऐ खुदा...
हमें मालूम है के बारिश की शक्ल में तेरा प्यार बरसने वाला है...

ख़ुशी!!!

आज अपने नसीब पर इठलाने को जी चाहता है...
खुश हूँ इतनी आज, के मेरा गुनगुनाने को जी चाहता है...

दुआओं भरा एक दिन नसीब हुआ है मुझे भी...
इस दिन को दिल में कैद कर लेने को जी चाहता है...

कुछ अपने भूल गए होंगे शायद मुझे लेकिन
अब गैरों की दुआओं से घर बसाने को जी चाहता है...

सोचा था की अब कोई ना बदल पायेगा मुझे
पर दोस्तों के प्यार की खातिर बदलने को जी चाहता है...